उत्तर प्रदेश के चंदौली का गुलाब जामुन अपने अनोखे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहाँ के कारीगर पारंपरिक तरीके से खोए का इस्तेमाल करके इसे तैयार करते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है। बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से बेहद नरम, यह गुलाब जामुन रस से लबालब होता है और मुँह में जाते ही घुल जाता है। खासतौर पर त्योहारों और खास मौकों पर चंदौली का यह गुलाब जामुन लोगों की पहली पसंद बन जाता है। दूर-दराज़ से आने वाले लोग भी इसका स्वाद लिए बिना नहीं लौटते!
चंदौली जिले के बबुरी लाल चौक पर स्थित बबुरी स्वीट्स हाउस सिर्फ एक मिठाई की दुकान नहीं, बल्कि एक परंपरा और विरासत का प्रतीक है। यह दुकान आजादी से पहले की है और लगभग 90 वर्षों से यहाँ के लोगों के स्वाद की पहचान बनी हुई है।
इस प्रसिद्ध दुकान की नींव जग्गू साव ने रखी थी। उस दौर में यह दुकान खपरैल (कच्ची मिट्टी और घास-फूस की छत) के बने घर में चलती थी। धीरे-धीरे समय बदला, परंपरा आगे बढ़ी और दुकान ने भी तरक्की की। जग्गू साव के बाद उनके पुत्र पृथ्वी नाथ, फिर रामसेवक ने इस व्यवसाय को संभाला।
वर्तमान में श्री सिहाल साह के साथ-साथ संतोष और संजय मोदनवाल इस दुकान की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। बबुरी स्वीट्स हाउस खास तौर पर अपने गुलाब जामुन के लिए जाना जाता है।
एक समय था, जब यहाँ एक गुलाब जामुन की कीमत केवल 15 पैसे हुआ करती थी। आज वही गुलाब जामुन 15 रुपए में बिकता है, लेकिन स्वाद में अब भी वही पुरानी मिठास है। यहाँ के गुलाब जामुन इतने मशहूर हैं कि दूर-दराज से लोग सिर्फ इन्हें खाने के लिए आते हैं।
दुकान की खास बात यह है कि यहाँ मिठाइयों के साथ-साथ चाट और समोसे भी बेहतरीन मिलते हैं। खासकर शाम के समय जब स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले यात्री बबुरी बस स्टैंड के पास पहुँचते हैं, तो इस दुकान की महक और स्वाद उन्हें बरबस ही अपनी ओर खींच लेती है।

बबुरी स्वीट्स हाउस केवल एक व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि एक जीवित इतिहास है। यह दुकान न सिर्फ मिठाइयाँ बेचती है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही मेहनत, लगन, और भरोसे की मिठास भी परोसती है। हर पीढ़ी ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से इस दुकान को एक नई ऊँचाई दी है।
आज जब देश तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है और बड़ी-बड़ी मिठाई की चेन उभर रही हैं, तब भी बबुरी स्वीट्स हाउस अपनी सादगी, गुणवत्ता और परंपरा के दम पर टिका हुआ है। यह दुकान न सिर्फ स्वाद का केंद्र है, बल्कि बबुरी और चंदौली के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. चंदौली के गुलाब जामुन की खासियत क्या है?
चंदौली के गुलाब जामुन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मुलायम बनावट और अनोखा स्वाद है। यह बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम होता है, जो मुँह में घुल जाता है। इसे पारंपरिक तरीके से खोए से बनाया जाता है।
2. बबुरी स्वीट्स हाउस की शुरुआत कब हुई थी?
बबुरी स्वीट्स हाउस की शुरुआत लगभग 90 साल पहले जग्गू साव ने की थी। यह दुकान आजादी से पहले की है और अब तक चार पीढ़ियों से इसी परिवार द्वारा चलाई जा रही है।
3. क्या बबुरी स्वीट्स हाउस में गुलाब जामुन के अलावा और क्या मिलता है?
जी हाँ! बबुरी स्वीट्स हाउस में गुलाब जामुन के अलावा चाट, समोसे और अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ भी मिलती हैं। यह दुकान अपने स्वादिष्ट नमकीन और मीठे स्नैक्स के लिए भी जानी जाती है।


























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